सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

छोटा आदमी, बड़ा आदमी

चुनाव हुये। सरकार बदली। कार्यक्रम बदले। क़ानून बदले।तय हुआ सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने पर 500 रुपये का जुर्माना होगा। जुर्माना वसूलने  का जिम्मा पुलिस को दिया गया। उसके लिए उन्हे एक अधिकार पत्र भी दिया गया।
क़ानून तो बदला ,लेकिन ,आदतें बदलनें में तो समय लगता है । पूर्व मंत्री जी की कार से केले का छिलका बाहर गिरा तो सिपाही नें कार को रोक लिया । नेता जी के गार्ड नें धमकाया "जानता नहीं कौन है ?" सिपाही नें अपना परिचय पत्र दिखाया बोला ,"बड़ों को तो सब जानते हैं , पर छोटों को अपना परिचयपत्र दिखाना पड़ता है। "फिर 500रु की रसीद काट कर नेता जी को थमा दी ।नेता जी नें चुपचाप 500 रु दे दिए और कार   आगे बढ़ गई । हर
पाँच सात किलोमीटर की  दूरी पर नेता जी की कार  से  गंदगी सड़क पर फेंकी जाती और नेता जी रसीद लेकर 500 रु दे देते। शाम के समय नेता जी के घर समर्थकों की भीड़ जुटी । नेता जी नें सारी रसीदें दिखाईऔर समझाया कि कैसे आम आदमी को परेशान किया जा रहा है । अगले दिन नेता जी को परेशान किए जाने के विरुद्ध गृह मंत्री के घर के बाहर जोरदार प्रदर्शन हुआ ।
रामू पिछली सरकार के समय भी रिक्शा चलाता था अब भी रिक्शा चलाता है । चलते चलते उसने सड़क पर थूका तो सिपाही नें उसको रोका ।  रामू नें कान पकड़ कर माफी मांगी । अब उसने अपनी रिक्शा के आगे एक छोटी  बाल्टी लटका ली है । अब उसे जब थूकना होता है तो उसी में थूकता है  और मौका मिलते ही उसे साफ कर लेता है । 

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